Sunday, August 14, 2011

माँ का खाना

कितने लम्हों बाद ये दिन दिखलाया,
आज माँ के हाथों का खाना खाया

उन हाथों को चूल्हे पर चलता देख,
आज दिल भर आया,
आज माँ के हाथों का खाना खाया

वो एहसास,वो स्वाद हमें फिर याद आया
 आज माँ के हाथों का खाना खाया

  भले कुछ जला सा,कुछ अध-पका सा,
   पर उसने है प्यार मिलाया,
आज माँ के हाथों का खाना खाया

   बड़े दुलार से उसने है थाल सजाया
आज माँ के हाथों का खाना खाया

  मुह से सीधे दिल में समाया,
   जब प्यारे हाथों से उसने मुझे खिलाया,
आज माँ के हाथों का खाना खाया

  हलके से उसने जब सर सहलाया ,
    हमने भी शरारत में ऊँगली को दबाया,
आज माँ के हाथों का खाना खाया 

   ना जाने उसने है क्या जादू चलाया,
आज माँ के हाथों का खाना खाया

    फिर वही एहसास,फिर वही स्वाद याद आया,
आज माँ के हाथों का खाना खाया

...आज माँ के हाथों का खाना खाया...
...आज माँ के हाथों का खाना खाया...