वोह उड़ गए यूँ भाप से,
और हम देखते रह गए...
इतने जुड़ गए हम आप से,
और हम दखते रह गए...
वो चाँद की चमक में झील का पानी,
हम बैठ किनारे ढूँढ़ते
झील में मछलियों की रानी.
वो हाथ मेरे हाथ में,
अजब एहसास हर एक बात में,
हर तारा मेरे साथ में,
पर एक ही रात में,
और हम देखते रह गए...
इतने जुड़ गए हम आप से,
और हम दखते रह गए...
वो चाँद की चमक में झील का पानी,
हम बैठ किनारे ढूँढ़ते
झील में मछलियों की रानी.
वो हाथ मेरे हाथ में,
अजब एहसास हर एक बात में,
हर तारा मेरे साथ में,
पर एक ही रात में,
बन गये सब ख्वाब से,
और हम देखते रह गये...
और हम देखते रह गये...
नहीं सब कुछ मगर ख्वाब था,
ये हकीक़त का जवाब था.
चाँद सी चमक दिखी,पर उसकी बात में
झील का पानी भी था,
छलका हुआ मेरी आँख में
हाथ भी मिला हमारा,पर दूर जाने के लिए
और तारे भी सब साथ थे,
पल भर की महफ़िल सजाने के लिएजल रहा था दिल ये मेरा
अपने पूरे शबाब से,
और हम देखते रह गए...
वो उड़ गए यूँ भाप से,
और हम देखते रह गए...
...और हम देखते रह गए...
...और हम देखते रह गए...
...और हम देखते रह गए...
