जिना ही मेरा ज़ुर्म है, होना मेरा गुनाह हो गया
पहले रौनक थी गांवों में, मेरे आने से शहर भी सूना हो गया
वो कहता है कि बहुत हैं उसके चाहने वाले
तो क्या वो रहनुमा हो गया??
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ख़्वाब में खुली आँख से देखता हूँ,
और पास, बहुत पास से देखता हूँ।
नज़दीकियों का मतलब ही नहीं अँधेरों में,
धरा अब मैं आकाश से देखता हूँ।
कुछ बूँदें गिरेंगी, उनका भार नहीं,
ये तो मेरे इश्क़ की शुरुआत भी नहीं।
वरना तो हद भी हद तलाशती है,
और ये सब जानते हैं मेरे जानने वाले
कि सफ़र हम अकेले किया नहीं करते।
हम मिट्टी हो गए उस बंजर होती ज़मीन में,
बस वो फूल खिला रहा है।
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कुछ भी हो, कोई उम्मीद मत रखना मुझसे,
उम्मीदों के साथ मैं भी चूर हो जाता हूँ।
कभी कोई अगर…
लो कह रहा हूँ आज — मुझे प्यार है तुमसे,
जवाब भले न देना, पर सामने मेरे इनकार मत करना।
मैं अब जाता हूँ, मुझे याद करना ज़रूर,
मगर मेरा इंतज़ार मत करना।
हाँ, तुम ही मेरे दिल में हो,
हाँ, तुम ही मेरे दिल में रहोगी।
मेरे इस एहसास का तुम गुमान मत करना।
मैं अब जाता हूँ, मुझे याद करना ज़रूर,
मगर मेरा इंतज़ार मत करना।
जब तक हूँ, पूरा आसमान इन सादे पन्नों पे उतार सकता हूँ।
आओ मिलकर वक़्त बर्बाद करें,
जो कभी ख़याल में नहीं था, उसे याद करें।
उजड़े हुए…


