Tuesday, January 20, 2026

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 जिना ही मेरा ज़ुर्म है, होना मेरा गुनाह हो गया

पहले रौनक थी गांवों में, मेरे आने से शहर भी सूना हो गया

वो कहता है कि बहुत हैं उसके चाहने वाले
तो क्या वो रहनुमा हो गया??



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ख़्वाब में खुली आँख से देखता हूँ,
और पास, बहुत पास से देखता हूँ।
नज़दीकियों का मतलब ही नहीं अँधेरों में,
धरा अब मैं आकाश से देखता हूँ।

कुछ बूँदें गिरेंगी, उनका भार नहीं,

ये तो मेरे इश्क़ की शुरुआत भी नहीं।
वरना तो हद भी हद तलाशती है,
और ये सब जानते हैं मेरे जानने वाले
कि सफ़र हम अकेले किया नहीं करते।

हम मिट्टी हो गए उस बंजर होती ज़मीन में,
बस वो फूल खिला रहा है।


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कुछ भी हो, कोई उम्मीद मत रखना मुझसे,
उम्मीदों के साथ मैं भी चूर हो जाता हूँ।
कभी कोई अगर…

लो कह रहा हूँ आज — मुझे प्यार है तुमसे,
जवाब भले न देना, पर सामने मेरे इनकार मत करना।
मैं अब जाता हूँ, मुझे याद करना ज़रूर,
मगर मेरा इंतज़ार मत करना।

हाँ, तुम ही मेरे दिल में हो,
हाँ, तुम ही मेरे दिल में रहोगी।
मेरे इस एहसास का तुम गुमान मत करना।
मैं अब जाता हूँ, मुझे याद करना ज़रूर,
मगर मेरा इंतज़ार मत करना।




जब तक हूँ, पूरा आसमान इन सादे पन्नों पे उतार सकता हूँ।

आओ मिलकर वक़्त बर्बाद करें,
जो कभी ख़याल में नहीं था, उसे याद करें।
उजड़े हुए…


Tuesday, April 26, 2022

 मैं अपनी तमाम बेचैन बेचैनियों को दबाता फिर रहा हूँ…

गर मैं खुश हूँ, तो मैं खुश हूँ — क्यों ये गाता फिर रहा हूँ…
रखा है एक क़दम बाहर अपनी ही हदें तोड़कर…
हदों को मैं पार कर नई हदें बनाता फिर रहा हूँ…

वो क्या है — कि, मैं डरपोक हूँ…
अपने ही सवालों से परेशान हूँ…
मैं पूछता हूँ ख़ुद से कि किधर जाना है,
कहाँ थम जाना है मुझे, कब बिखर जाना है।
रोशनी, रंग, आवाज़ — सब है मेरे ख़याल में,
मैं ख़यालों में ही महफ़िल सजाता फिर रहा हूँ।

कुछ बात है मुझमें, जो मुझसे ही छिपी है,
अपनी ही बातों का बतंगड़ बनाता फिर रहा हूँ।

मैं हूँ या नहीं हूँ…
मेरा सवाल है मुझसे ही…
मुझे शक़ है ख़ुद के ही वजूद पे,
और ग़ज़ल ज़िंदगी पे बनाता फिर रहा हूँ।

मैं —
आईने में ख़ुद को मैं पहचान नहीं पाता,
तस्वीर औरों की मैं बनाता फिर रहा हूँ।

मेरा ख़ुद पे एक एहसान है,
जो ये पाक मेरा ईमान है।
मैंने पाला ये भरम ज़िंदगी की ख़ातिर,
मैं अब क्या करूँ जो ज़िंदगी ही बेईमान है।
क्या सही, क्या ग़लत है — अब अंदाज़ा ही नहीं इसका मुझे,
आप-बीती को नाइंसाफ़ियाँ मैं, बताता फिर रहा हूँ।

रोशनी पसंद नहीं मुझे,
मगर परछाइयाँ देख मैं खुश होता हूँ।
मुझे प्यार है काली रातों से,

मुझे ख़ुद से कोई भी उम्मीद नहीं।

मैं अपने आप से लड़ रहा हूँ,
छोड़ मैं पीछे ख़ुद को, आप ही बढ़ रहा हूँ।

कभी होगी फ़ुरसत तो मैं सोचूँगा,
कि मैं मग़रूर कहाँ हूँ।
जंग मैं लड़ रहा दुनिया की सच्च की,
पर ख़्वाब मैं अपने झुठलाता फिर रहा हूँ।

मैं बिखरा हूँ, मगर अभी टूटा नहीं हूँ।




Monday, October 12, 2020

 कम से कम पैसों में, कैसे करने हैं सब काम,

कभी मिलता नहीं, तुमको अपनी मेहनत का इनाम।
तुमको क्या मालूम कि गहरी नींद में सोना कैसा होता है,
माँ हो तुम, और माँ का होना ऐसा होता है।

सर और कमर दर्द से जाग-जाग कर सोने वाली माँ,
हम बच्चों को देख खुश होने वाली माँ।
सिकुड़े हुए हाथों से कपड़े धोने वाली माँ,
बच्चों से छुप-छुप कर रोना कैसा होता है,
माँ हो तुम, और माँ का होना ऐसा होता है।

सबकी अपनी इंटेलिजेंस का रुआब तुम पर भारी है,
लेकिन तुमने प्रेम की गंगा घर में उतारी है।
बाँधना घर को एक धागे में कितना भारी है,
मम्मी, इसमें सिर्फ तुम्हारी ही होशियारी है।
तुमको मालूम है फैमिली को पिरोना कैसा होता है,
माँ हो तुम, और माँ का होना ऐसा होता है।

ओल्ड फ़ैशन हो कहकर हम बेटियाँ तुम पर हँसती हैं,
“तुमको नहीं मालूम” की फ़ब्तियाँ तुम पर कसती हैं।
“बहुत सीधी हो तुम” की उपाधि तुमको डसती है,
फिर भी इस घर में ही तुम्हारी दुनिया बसती है।
छत, दीवारें, कोना-कोना महकाना कैसा होता है,
माँ हो तुम, और माँ का होना ऐसा होता है।



Saturday, August 20, 2011

जिद की है ...

जिद की है ...

उन परिंदों के साथ उड़ने की
उनके सफ़र में साथ जुड़ने की
इन हवाओं के खिलाफ मुड़ने की
हमने जिद की है...

हमने जिद की है...
जज़्बात दिल के दुनिया को बताने की
दबी हर आवाज़ चीख कर सुनाने की
रोष बरसों का आज खुलकर जताने की
हमने जिद की है...

हमने जिद की है...
सूरज को रौशनी दिखाने की
चिंगारी को शोला बनाने की
जिद करके जिद को बढ़ने की
हमने जिद की है...

सदी बदली है,वक़्त बदला, अब दुनिया की सोच बदलेंगे 
छिपे  जो दाग चेहरों में हैं, उनके हम वेश बदलेंगे 
बहुत की कोशिशें छोटी, अब पूरा हम देश बदलेंगे

जिद की है जिद को परवान चढाने की
जिद की है अब अपनी आवाज़ बढाने की
जिद की है तिनकों को समुन्दर से बचाने की
जिद की है खुद को इन्साफ दिलाने की
हमने जिद की है...
हमने जिद की है...