जिद की है ...
उन परिंदों के साथ उड़ने की
उनके सफ़र में साथ जुड़ने की
इन हवाओं के खिलाफ मुड़ने की
हमने जिद की है...
हमने जिद की है...
जज़्बात दिल के दुनिया को बताने की दबी हर आवाज़ चीख कर सुनाने की
रोष बरसों का आज खुलकर जताने की
हमने जिद की है...
सूरज को रौशनी दिखाने की
चिंगारी को शोला बनाने की
जिद करके जिद को बढ़ने की
हमने जिद की है...
सदी बदली है,वक़्त बदला, अब दुनिया की सोच बदलेंगे
छिपे जो दाग चेहरों में हैं, उनके हम वेश बदलेंगे
बहुत की कोशिशें छोटी, अब पूरा हम देश बदलेंगे
बहुत की कोशिशें छोटी, अब पूरा हम देश बदलेंगे
जिद की है जिद को परवान चढाने की
जिद की है अब अपनी आवाज़ बढाने की
जिद की है तिनकों को समुन्दर से बचाने की
जिद की है खुद को इन्साफ दिलाने की
जिद की है खुद को इन्साफ दिलाने की
हमने जिद की है...
हमने जिद की है...
हमने जिद की है...



1 comment:
is jid ko kayam rakhiye..
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